फिर वही तलाश

एक आस,
फिर
वही तलाश,
मुझे मेरे होने का अहसास,
और वही बेकरारी,
फिर से जीने की लालशा...
कभी अच्छा है ये भी,
कभी, न भी हो तो अच्छा है।

सुन्दर कविता जिसके अर्थ काफी गहरे हैं...

मैंने .. हर रोज .. जमाने को .. रंग बदलते देखा है ....
उम्र के साथ .. जिंदगी को .. ढंग बदलते देखा है .. !!

वो .. जो चलते थे .. तो शेर के चलने का .. होता था गुमान..
उनको भी .. पाँव उठाने के लिए .. सहारे को तरसते देखा है !!

जिनकी .. नजरों की .. चमक देख .. सहम जाते थे लोग ..
उन्ही .. नजरों को .. बरसात .. की तरह ~~ रोते देखा है .. !!

जिनके .. हाथों के .. जरा से .. इशारे से .. टूट जाते थे ..पत्थर ..
उन्ही .. हाथों को .. पत्तों की तरह .. थर थर काँपते देखा है .. !!

जिनकी आवाज़ से कभी .. बिजली के कड़कने का .. होता था भरम ..
उनके .. होठों पर भी .. जबरन .. चुप्पी का ताला .. लगा देखा है .. !!

ये जवानी .. ये ताकत .. ये दौलत ~~ सब कुदरत की .. इनायत है ..
इनके .. रहते हुए भी .. इंसान को ~~ बेजान हुआ देखा है ... !!

अपने .. आज पर .. इतना ना .. इतराना ~~ मेरे .. यारों ..
वक्त की धारा में .. अच्छे अच्छों को ~~ मजबूर हुआ देखा है .. !!!

कर सको......तो किसी को खुश करो......दुःख देते ........तो हजारों को देखा है..💐💐💐💐💐

पर शब्द नही है मेरे पास

सोचा दिल की व्यथा को
कागज़ पर उतारू
तुक लए और ताल से
उसे सवारू
दिल व्यथित है आज
तन्हाई है मेरे पास
परिस्थिति ने मुझे
किया मजबूर
सपने जब हकीक़त से टकराए
हो गए चकनाचूर

भावनाओ को व्यक्त करने के लिए
मै ढूंढ़ रहा हु
शब्दों को
लेकिन असमर्थ हु
उन्हें खोज पाने में

चेहरे पर उदासी है
दिल हार गया है
आंखों में आसू है
पर शब्द नही है मेरे पास

​नूतन वर्ष ​2015 की आप को हार्दिक शुभकामनाये

तिथि बदलती है बस
वक्त कहाँ बदलता है
वैसे ही पुराने ढ़र्रे पर
जीवन चलता रहता है!

एक सुबह का आगमन
एक संध्या की विदाई
वही पुराना सिलसिला
चक्रवत चलता रहता है!

सदियों के इस मेले में
एक वर्ष की क्या बिसात
प्रचंड अग्नि की लपटों में
जीवन जलता रहता है!

समय जो बीत रहा है
वह लौट नहीं पाएगा
अंत आखिर होना ही है
दिन ढ़लता रहता है!

बीत रहा जो वर्ष
वह दे जाए आशीष
नव प्रभात सुखद रहे
सपना पलता रहता है!

​​
नूतन वर्ष
2015

की आप को हार्दिक शुभकामनाये.