ध्यान

सुगंधित धूप की छांव तले
जब भी करता हूँ तुम्हारा ध्यान
तो तुम्हारी कसम!
सिर्फ तुम ही नहीं दिखाई देते

दिख पड़तें हैं कई किस्से
लम्बी कतार में तितर बितर आदमी
गहरी चिंता में सांस छोड़ता समय
अपनी हरियाली को खीजते पेड़
चिड़ियों के शूर से बेज़ार सुबह
जल्द ही गुम हो जाने को नज़र आती है

उजाले की एक महीन लकीर


तुम्हारी कसम!

बड़ा बैचन कर देता है तुम्हारा ध्यान!

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