बारामती कृषिमंत्री शरद पवार का निर्वाचन क्षेत्र रहा है, जहां से उन्होंने लगातार कई चुनाव जीते हैं। इस बार वहां से उनकी बेटी सुप्रिया सुले उम्मीदवार हैं। महाराष्ट्र में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस गठबंधन की सरकार है और शरद पवार के भतीजे अजित पवार उपमुख्यमंत्री हैं। पवार परिवार के पास सत्ता की इतनी ताकत होने
राजनीति में नीतियों और मुद्दों पर मतभेद और भ्रष्टाचार आदि को लेकर आरोप-प्रत्यारोप चलते रहते हैं। पर हमारे राजनीतिक अगर धमकी और हिंसा की भाषा बोलने लगें, तो सवाल सिर्फ चुनावी आचार संहिता का नहीं, यह भी है कि कानून के शासन का क्या होगा। फिर, चाहे मुलायम सिंह हो या अजित पवार या फारूक अब्दुल्ला, ये सत्तासीन हैं। इसलिए इनकी धमकियां और भी ज्यादा चिंताजनक हैं। पिछले दिनों आयोग ने अमित शाह और आजम खान को चुनाव प्रचार से अलग रहने का आदेश सुनाया था। आमतौर पर आयोग की कार्रवाई नोटिस देने और लिखित स्पष्टीकरण या जवाब पाने तक सीमित रहती है। इसलिए आयोग के नोटिसों को राजनीतिक लोग अमूमन ज्यादा तवज्जो नहीं देते; शायद वे सोचते हैं कि बात आई-गई हो जाएगी। यह विडंबना ही है कि जो लोग चुनाव से ही ताकत हासिल करते हैं, वे चुनाव की विश्वसनीयता की फिक्र नहीं करते!